बोकारो, दिसम्बर 31 -- बोकारो, प्रतिनिधि। आनंदमार्ग प्रचारक संघ के तत्वावधान में आनंदमार्ग में चल रहे धर्म महासम्मेलन के दूसरे दिन भारी संख्या में देश विदेश में मार्गी पहुंचे। बाबा नाम केवलम कीर्तन में मार्गी शामिल होकर आध्यात्मिक लाभ उठाएं। धर्म महासम्मेलन को संबोधित करते हुए आनंद मार्ग प्रचारक संघ के पुरोधा प्रमुख श्रद्धेय आचार्य विश्वदेवानंद अवधूत ने कहा कि राधाभक्ति का चरम भाव: प्रभु! तुम सिर्फ मेरे हो और मेरे होकर ही रहोगे। मुख्य प्रवचन में श्रद्धेय प्रमुख आचार्य विश्वदेवानंद अवधूत ने भक्ति की अवस्थाओं के भेद विषय पर कहा कि भक्ति अनेक रूपों में अभिव्यक्त होती है। इसका मूल है श्रद्धा, और श्रद्धा का आधार है प्रेम। प्रेम का अर्थ है अखंड सत्ता के प्रति आकर्षण। यदि हम प्रेम नहीं करते, तो श्रद्धा भी नहीं हो सकती। श्रद्धालु की पहचान है वह कह...