वाराणसी, जनवरी 11 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। प्रेमचंद की कहानी 'बौड़म' एक तीखी सामाजिक-मनोवैज्ञानिक व्यंग्य कथा है। इसमें प्रेमचंद ने तथाकथित सभ्य समाज की संवेदनहीनता और दोहरे मानदंडों पर करारा प्रहार किया है। उक्त कथन हिमांशु उपाध्याय ने उपन्यास सम्राट प्रेमचंद स्मारक लमही में रविवार को सुनो मैं प्रेमचंद के 1791वें संस्करण में कहीं। प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र ट्रस्ट की ओर से आयोजित 'बौड़म' के पाठ समारोह को वह संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर प्रो.श्रद्धानंद, डॉ.रामसुधार सिंह, नरेंद्रनाथ मिश्र ने भी विचार रखे। इस अवसर पर अंजनी कुमार सिंह को 'प्रेमचंद मित्र' सम्मान दिया गया। कार्यक्रम का संयोजन राजीव गोंड, स्वागत अशोक पांडेय, संचालन आयुषी दुबे और धन्यवाद वाचस्पति चतुर्वेदी ने दिया। मुख्य रूप से अशफ़ाक सिद्दीकी, अश्विवित दुबे, नमन श्रीवास्तव...
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