ललितपुर, मार्च 28 -- प्रागैतिहासिक क्षेत्र नवागढ़ में संग्रहित दुर्लभ व अनुपलब्ध जैन ग्रंथों के संरक्षण के लिए 'जिनवाणी संरक्षण एवं प्रबंधन समिति सागर' के तत्वावधान में आयोजित द्वि-दिवसीय कार्यशाला का गरिमामय आयोजन प्रतिष्ठा पितामह पंडित गुलाबचंद पुष्प पुस्तकालय में हुआ। जिसमें डॉ. संजीव सराफ ने नवागढ़ की प्राचीन धरोहर की सराहना करते हुए कहा कि यहां संरक्षित सामग्री अन्यत्र दुर्लभ है। विशाल शैलाश्रयों के मध्य स्थित साधना स्थली, लगभग आठ हजार वर्ष प्राचीन शैलचित्र, गुप्तकालीन उत्कीर्ण कलाकृतियां, काष्ठ निर्मित मानस्तंभ, प्राचीन वेदियां, मंदिर संरचनाएं तथा उत्खनन से प्राप्त पाषाणकालीन उपकरण नवागढ़ की गौरवशाली परंपरा को दर्शाते हैं। सातवीं शताब्दी की प्रतिमाएँ एवं विलक्षण मानस्तंभ यहाँ के ऐतिहासिक महत्व को और अधिक सुदृढ़ करते हैं।

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