प्रह्लाद की कथा बुराई पर अच्छाई और अटूट भक्ति की जीत का प्रतीक: चंदन शरण
दुमका, मई 27 -- सरैयाहाट, प्रतिनिधि। सरैयाहाट-जमुआ ब्राह्मण टोला में पुरुषोत्तम मास के अवसर पर सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा महायज्ञ का आयोजन किया गया है। जिसके चौथे दिन कथा वाचक बाल ब्यास चंदन शरण ने कहा कि भागवत कथा एक महासागर है। इसमें जो डुबकी लगाता है वह ईश्वर के अधीन हो जाता है। उसके पापकर्म धीर-धीरे समाप्त होने लगते है। पापकर्म समाप्त होने के साथ ही उसे आनन्द की अनुभुति होने लगता है। उन्होंने कहा कि भागवत कथा के श्रवण से भक्ति के प्रति विश्वास बढ़ता है। कहा कि जब भी मन अशांत लगे, दुख में हों, तो कृष्ण की कथा व उनकी लीला को सुनना व स्मरण करना चाहिए। कृष्ण कथा श्रवण से सभी प्रकार के दुख स्वत: समाप्त होने लगते है। यह भी पढ़ें- भागवत कथा मृत्यु के भय से मुक्ति दिलाता है : चंदन शरणकथा का वर्णन उन्होंने कथा में हिरण्यकश्यप और प्रहलाद की ...
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