पूर्णिया, जनवरी 28 -- बैसा, एक संवाददाता। प्रखंड़ क्षेत्र के अनगढ़ हाट में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथा व्यास साध्वी मेरुदेवा भारती ने भक्त प्रह्लाद के चरित्र की विस्तार से विवेचना की गई। श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि सच्ची भक्ति किसी परिस्थिति की मोहताज नहीं होती, बल्कि अत्याचार, भय और संकट में भी वह और अधिक प्रखर हो जाती है। हिरण्यकश्यप जैसे अहंकारी और अत्याचारी पिता के बीच बालक प्रह्लाद ने न तो भय स्वीकार किया, न ही लोभ और दंड के आगे झुके। गुरु नारद से प्राप्त भगवत्-नाम और तत्वज्ञान उनके जीवन का आधार बना। उन्होंने कहा की जब-जब अहंकार और अधर्म चरम पर पहुँचते हैं, तब-तब भगवान स्वयं धर्म की रक्षा के लिए प्रकट होते हैं। हिरण्यकश्यप का अहंकार जब ईश्वर को चुनौती देने लगा और अधर्म अपनी पराकाष्ठा पर पहुँच गया, तब...