मिर्जापुर, अप्रैल 3 -- जिगना,हिन्दुस्तान संवाद। क्षेत्र के डंगहर गाँव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथा व्यास विनोदानंद महराज ने प्रह्लाद की भक्ति भावना व हिरण्यकश्यप वध की कथा सुनाई। कहा कि पांडवों के एकांतवास के दौरान यक्ष के प्रश्नों का उत्तर देते हुए युधिष्ठिर ने कहा था कि सत्य ही स्वर्ग प्राप्ति का एकमात्र साधन है। पुत्र मनुष्य की आत्मा है। उदारता धर्म से बढ़कर है। सज्जनों की मित्रता से कभी दुख नहीं होता। अहंकार के त्याग से मनुष्य सबका प्रिय हो जाता है। क्रोध के त्याग से शोक नहीं होता। जीवन का धर्म व मर्म समझाते हुए आचार्य अशोक शुक्ल ने कहा कि स्वधर्म का पालन ही सबसे बड़ी तपस्या है। क्रोध दुर्जेय शत्रु है। लोभ कभी समाप्त नहीं होने वाली बीमारी है। जो परिवार के साथ प्रसन्न रहता है वह सबसे प्रसन्न व्यक्ति है। यजमान रविंद्रनाथ ...