लखनऊ, जनवरी 30 -- लखनऊ, कार्यालय संवाददाता उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान की ओर से वृन्दावन लाल वर्मा एवं जयशंकर प्रसाद स्मृति एक दिवसीय संगोष्ठी हुई। संगोष्ठी में वक्ताओं ने साहित्यकारों के लेखन पर प्रकाश डाला। डा. पुनीत बिसारिया ने कहा कि वृन्दावन लाल वर्मा अपने साहित्य में हमें एक अलग तरह के इतिहास से परिचित कराते हैं। वृन्दावन लाल वर्मा का झांसी की रानी उपन्यास में नारी सशक्तिकरण का एक अभूतपूर्ण चित्रण मिलता है। उनकी रचना विराटा की पद्मिनी एक ऐतिहासिक उपन्यास है। उनमें अभूतपूर्व कल्पना शक्ति थी, जिसे उन्होंने अपनी रचनाओं में प्रयोग किया है। वृन्दावन लाल वर्मा ने बुन्देलखण्ड की संस्कृति को अपनी रचनाओं में जीवन्त कर दिया। सुरेन्द्र अग्निहोत्री ने कहा कि वृन्दावन लाल वर्मा ने हमें रानी लक्ष्मीबाई, विराटा की पद्मिनी, गढ़कुंढ़ार, मृगनयनी, कचनार...