वाराणसी, जून 4 -- वाराणसी, कार्यालय संवाददाता। संत कबीर अकादमी (मगहर) और लहरतारा स्थित प्राचीन सदगुरु कबीर प्राकट्यस्थली की संयुक्त कार्यशाला में प्रशिक्षुओं ने निर्गुण स्वर सीखा। प्रशिक्षक देवेंद्र दास ने उन्हें 'साखी' की गायन विधा और शैली बताई। प्रशिक्षण के दौरान लोग कबीर की वाणी से भावविभोर दिखे। बता दें कि बुधवार को 10 दिवसीय कार्यशाला का दूसरा दिन रहा।कबीरचौरा स्थित मूलगादी के डॉ. भागीरथी दास मुख्य वक्ता थे। उन्होंने संत कबीरदास के कृतित्व-व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। प्रशिक्षुओं को उनकी वाणियों का महत्व बताया। अलग-अलग प्रांतों उन्हें गाने की विधा से परिचित कराया। कहा कि यात्राओं के दौरान संत कबीरदास ने निर्गुण स्वर से तमाम प्रांतों को प्रभावित किया। यह भी पढ़ें- महंत भागवत साहेब के निधन पर श्रद्धालुओं में शोक की लहर यही वजह रही कि उनक...