नई दिल्ली, जुलाई 10 -- हर वर्ष मानसून का आगमन देशवासियों के लिए राहत, हरियाली और नवजीवन के संदेश के साथ आता है। विडंबना है कि यही बारिश हमारे अधिकांश शहरों की बदहाल व्यवस्था की पोल भी खोल देती है। कुछ घंटों की वर्षा के बाद सड़कों का तालाब में बदल जाना, घरों और बाजार में पानी भर जाना, घंटों तक यातायात ठप रहना और बिजली-पानी जैसी मूलभूत सेवाओं का बाधित हो जाना अब सामान्य दृश्य बन गया है। यह स्थिति केवल प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही प्रशासनिक लापरवाही और अव्यवस्थित शहरी नियोजन का परिणाम है। देश के महानगरों से लेकर छोटे शहरों तक लगभग हर मानसून में एक जैसी तस्वीर सामने आती है। सवाल यह है कि जब हर वर्ष बारिश का समय निश्चित है, तो फिर हर बार नगर निकायों की तैयारियां क्यों विफल हो जाती हैं? नालों की सफाई के दावे कागजों तक सीमित क्...