भभुआ, जनवरी 21 -- कभी हर गांव की पहचान थी मिट्टी की मूर्तिकला, आज गिने-चुने कारीगरों के भरोसे जीवित सरस्वती पूजा व नवरात्र जैसे त्योहारों में ही मिलती है रोज़ी, अन्य दिनों में बैठकर बिताते हैं समय (बोले भभुआ) भभुआ, नगर संवाददाता। मिट्टी से जीवन, आस्था और संस्कृति को आकार देने वाली मूर्तिकारों की कला आज प्रशासनिक उपेक्षा के कारण दम तोड़ती नजर आ रही है। एक समय था जब ग्रामीण क्षेत्रों के लगभग हर गांव में मिट्टी के मूर्तिकार हुआ करते थे। देवी-देवताओं की प्रतिमाएं, लोक आस्था से जुड़ी आकृतियां और पारंपरिक शिल्प गांवों की पहचान हुआ करती थी। लेकिन, बदलते समय और सरकारी सहयोग के अभाव में यह कला अब समाप्ति की कगार पर पहुंच गई है। ग्रामीण इलाकों से यह कला लगभग लुप्त हो चुकी है। शहरी क्षेत्रों में कुछ गिने-चुने मूर्तिकार ही बचे हैं, जो त्योहारों के अवसर...
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