गुड़गांव, अप्रैल 4 -- गुरुग्राम, संवाददाता। गुरुग्राम जैसे तेजी से विकसित होते शहर की चमक-दमक के पीछे जिन प्रवासी मजदूरों की मेहनत छिपी है, आज वही मजदूर महंगाई की मार से सबसे ज्यादा परेशान हैं। शहर की इमारतें खड़ी करने से लेकर रोजमर्रा की व्यवस्था को चलाने तक, हर छोटे-बड़े काम की रीढ़ बने ये मजदूर अब रसोई गैस के बढ़ते दामों के कारण दो वक्त की रोटी तक के लिए जूझ रहे हैं। हालात ऐसे हो गए हैं कि उनकी दिहाड़ी का बड़ा हिस्सा सिर्फ खाना बनाने में ही खर्च हो रहा है, जिससे न तो बचत हो पा रही है और न ही वे अपने परिवार को गांव पैसे भेज पा रहे हैं। मजबूरी में कुछ मजदूर शहर छोड़ने लगे हैं, तो कई लौटने की तैयारी में हैं, जिससे शहर की कार्यप्रणाली पर भी असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।शहर के सेक्टर-56 में काम करने वाले बिहार के मधुबनी निवासी राजेश कुमार ब...