भागलपुर, मई 31 -- कहलगांव, निज प्रतिनिधि। प्रभु श्रीकृष्ण की लीलाएं अपरंपार थी। बचपन में काफी नटखट थे। कब कहां पहुंचकर लोगों को चिढ़ा दे यह कोई नहीं जानता था। यमुना तट पर लीला करना, माखन चोरी यह सभी उनकी लीला थी। अत्याचारियों को नाश करने के लिए ही अवतार लिए थे। श्रीकृष्ण की लीलाएं प्रेम, समर्पण एवं अहंकार त्याग कर ईश्वर की शरण ग्रहण करने की प्रेरणा देती है। यह बातें कहलगांव पटेल नगर में सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा सह त्रिवेणी महोत्सव में कथा वाचन करते हुए कथावाचक स्वामी रामानंद शास्त्री महाराज ने कही है। उन्होंने कृष्णावतार के बाद कृष्ण जी के बाल्यावस्था में माखन चोरी, यमुना नदी का कलियानाग के साथ क्रीड़ा, घटनाएं के साथ-साथ गोर्वधन पूजा की विस्तृत कथा, श्रीकृष्ण की बाल एवं किशोर लीलाओं का विस्तार से वर्णन किया। इस अवसर पर संगीतमय ...