सोनभद्र, मई 20 -- अनपरा,संवाददाता। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने आरोप लगाया है कि बिजली कर्मियों के विरुद्ध की गई उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस न लिए जाने से कर्मचारियों में भारी असंतोष और आक्रोश व्याप्त है। निजीकरण और दमनात्मक नीतियों अपना रहे प्रबन्धन की नाकामी के कारण भीषण गर्मी के दौरान प्रदेश की बिजली व्यवस्था चरमराने की स्थिति में पहुंच गई है। प्रबंधन बिजली कर्मियों का सहयोग लेने के बजाय उत्पीड़न और टकराव का रास्ता अपना रहा है। संघर्ष समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने आरोप लगाया कि डाउनसाइजिंग के नाम पर 20-25 वर्षों से बिजली व्यवस्था संभाल रहे संविदा कर्मियों को नौकरी से निकाला जा रहा है, वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर नियमित कर्मचारियों के पद समाप्त कर दिए गए हैं। इससे बिजली व्यवस्था में भारी अव्यवस्था पैदा हो गई है।...