नई दिल्ली, अक्टूबर 19 -- नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि किसी विरोध प्रदर्शन में केवल शामिल होने से यह साबित नहीं होता कि व्यक्ति का पुलिसकर्मियों के काम में बाधा डालने का कोई साझा इरादा था। न्यायमूर्ति संजीव नरूला की पीठ ने यह टिप्पणी तब की, जब उन्होंने खुर्शीद अहमद के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द करने के आदेश दिए। पीठ ने कहा, अहमद एसएससी परीक्षा की तैयारी करने वाला छात्र है, जो 24 अगस्त 2025 को दिल्ली के रामलीला मैदान में परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ हुए प्रदर्शन में शामिल हुआ। अदालत ने कहा, साझा इरादे के सिद्धांत के लिए यह जरूरी है कि आपराधिक कृत्य उन लोगों के साझा इरादे को आगे बढ़ाने के लिए किया गया हो, जिन्हें संयुक्त रूप से जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। यह भी पढ़ें- अभिजीत दीपके और नेहा बोरा रिहा, लेकिन ...