हल्द्वानी, जुलाई 21 -- हल्द्वानी। प्रतियोगी परीक्षाओं की बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच विद्यार्थियों का मानसिक स्वास्थ्य गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी के मानसिक रोग विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर एवं प्रभारी विभागाध्यक्ष डॉ. तनुश्री गौड़ ने कहा कि परीक्षा जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन इसे किसी विद्यार्थी की क्षमता, व्यक्तित्व या भविष्य का अंतिम पैमाना नहीं माना जाना चाहिए।

परीक्षा का तनाव उन्होंने बताया कि प्रवेश और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, अधिक अंक लाने की होड़, भविष्य की चिंता और पारिवारिक अपेक्षाओं के कारण कई छात्र-छात्राएं मानसिक तनाव, प्रदर्शन संबंधी चिंता, आत्मविश्वास में कमी और अवसाद जैसे लक्षणों का सामना कर रहे हैं। लगातार तनाव रहने से मस्तिष्क की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है, जिससे परी...