मेरठ, जून 8 -- मेरठ। प्रकृति हमारी हर जरूरत पूरी करने में सक्षम है, लेकिन जरूरत से अधिक इच्छाओं के कारण मानव उसके अंधाधुंध दोहन में जुट गया है। यही वजह है आज प्रकृति का संतुलन बिगड़ रहा है और उसके दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं। यह बात ब्रह्माकुमारी सुनीता बहन ने कही। दिल्ली रोड स्थित ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विवि के प्रभु मिलन भवन में रविवार को विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित प्रकृति परिवर्तन कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि मनुष्य के भीतर बढ़ रही विकृतियां ही बाहरी प्रकृति को भी प्रभावित कर रही हैं। यदि व्यक्ति अपने जीवन में करुणा, दया और अपनत्व के भाव को स्थान दे तो प्रकृति भी अपने वरदानी स्वरूप में दिखाई देगी। कहा कि प्रकृति से उतना ही लेना चाहिए, जितनी आवश्यकता हो। यदि किसी कारणवश एक वृक्ष काटना पड़े तो उसके स्थान पर कई पौधे अवश्य लगाने चाहिए। स...