बांका, अक्टूबर 29 -- बांका, निज प्रतिनिधि। प्रकृति से प्रेम, सूर्य और जल की महत्ता का प्रतीक लोक आस्था का महापर्व छठ लोगों को पर्यावरण संरक्षण के साथ ही संस्कृति व संस्कारों के पुनर्जागरण का संदेश दे गया। छठ महापर्व, महज त्यौहार ही नहीं बल्कि हमारी सनातन संस्कृति व संस्कारों का धरोहर भी है। छठ ही एक ऐसा पर्व है जिसमें डूबते सूर्य को अर्ध्य समर्पित कर उपासना के बाद ही उगते सूर्य की आराधना की जाती है। उदयाचल सूर्य की उपासना के पूर्व अस्ताचल सूर्य की आराधना की अनोखी परंपरा समाज में फैल रहे भेद-भाव, छुआछूत व उंच-नीच जैसी सामाजिक कुरीतियों को समाप्त कर समरस समाज के निर्माण की ओर अग्रसर होने का संदेश देती है। इसलिए तो छठ को मात्र एक त्यौहार तक सीमित नहीं रखा जा सकता है, यह हमारे समाज की संस्कृति व संस्कार एवं बिहार प्रदेश की अस्मिता की एक पहचान...
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