बिहारशरीफ, मार्च 13 -- प्रकृति का वरदान है भूलने की क्षमता: गगन गिल अंधकार में कलम बनी सबसे बड़ी चिकित्सक: डॉ नीना वर्मा फोटो: साहित्य 03: राजगीर के अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में शुक्रवार को शोक और उसकी रचनात्मक अभिव्यक्ति विषय पर अपने अनुभव साझा करतीं लेखिका गगन गिल और डॉ नीना वर्मा। राजगीर, निज संवाददाता। साहित्य महोत्सव का तीसरा सत्र मानवीय संवेदनाओं के सबसे संवेदनशील विषय पर केंद्रित रहा। 'शोक को कलमबद्ध करना: अनुभव से अभिव्यक्ति तक' विषय पर आयोजित इस सत्र में वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि दुख को शब्दों में पिरोना कतई आसान नहीं होता। जब इंसान गहरे शोक में होता है तो वह पूरी तरह शब्दहीन हो जाता है। प्रख्यात लेखिका गगन गिल ने राजगीर की ही किसा गौतमी की कहानी सुनाई। उन्होंने कहा कि विशुद्ध दुख और पीड़ा हमेशा शब्दहीन होती है। शुरुआत में इं...