वाराणसी, जून 30 -- वाराणसी। किसी नाटक में अभिनय, संवाद, सेट, संगीत, ड्रेस, मेकअप ये सारी चीजें एक तरफ और प्रकाश एक तरफ। यह कहना गलत नहीं होगा कि प्रकाश संयोजन में होने वाले उतार-चढ़ाव के साथ-साथ नाटक की सांसें ऊपर-नीचे होती हैं। यह कहना है राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के प्रकाश विशेषज्ञ डॉ.गोविंद सिंह यादव का। वह इन दिनों भारतेंदु नाट्य अकादमी के सहयोग से नागरी नाटक मंडली में प्रकाश पर आयोजित कार्यशाला में काशी के युवाओं को प्रशिक्षण दे रहे हैं। आप के अपने अखबार 'हिन्दुस्तान' से खास बातचीत में उन्होंने कहा कि यह दुखद पक्ष है कि भारत में अभी नाटकों में लाइट को उतना महत्व नहीं दिया जाता जितना दिया जाना चाहिए। यह भी पढ़ें- अंधेर नगरी चौपट राजा के दमदार मंचन के साथ इप्टा की कार्यशाला संपन्न प्रकाश के प्रभाव से वह सब व्यक्त किया जा सकता है जो संवा...