गोंडा, मई 24 -- गोण्डा, संवाददाता। भीषण गर्मी के बीच जिले में मनरेगा योजना के तहत बनाए गए हजारों तालाब सूखने लगे हैं। कभी ग्रामीणों, पशुओं और पक्षियों के लिए राहत का सहारा बने ये पोखरे अब प्यासे मैदान में तब्दील होते जा रहे हैं। हालात यह हैं कि मवेशियों के साथ पक्षियों को भी पानी की तलाश में गांव- गांव भटकना पड़ रहा है। लोगों ने पोखरों में पानी भरवाए जाने की मांग की है। जिले के 16 ब्लॉकों में मनरेगा के तहत करीब 4200 से अधिक तालाबों की खुदाई और निर्माण कराया गया था। इनका उद्देश्य वर्षा जल संचयन, भूगर्भ जल स्तर को सुधारना और पशुओं को सालभर पानी उपलब्ध कराना था। यह भी पढ़ें- जल संरक्षण : करोड़ों खर्च फिर भी प्यासी धरती इसके अलावा जिले में 277 अमृत सरोवर भी विकसित किए गए हैं। हालांकि कुछ पुराने तालाबों और अमृत सरोवरों में अभी पानी मौजूद है, ले...