नई दिल्ली, दिसम्बर 8 -- हिंदू परंपरा में पौष महीना सिर्फ एक तारीखों का दौर नहीं, बल्कि मन और जीवन को फिर से संवारने का मौका माना जाता है। इसे सूर्यदेव का विशेष काल कहा गया है, जहां अनुशासन, भक्ति और पवित्रता सबसे बड़ा धर्म बन जाते हैं। इस महीने को आत्मिक साफ-सफाई, ऊर्जा बढ़ाने और रोजमर्रा की जिंदगी में ताजगी लाने के समय के रूप में देखा जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार पौष साल का दसवां महीना है और इसे सूर्यदेव की उपासना के लिए सबसे उत्तम समय बताया गया है। शास्त्रों में इस अवधि को ऐसा समय माना गया है जब तपस्या, संयम और सदाचार का फल कई गुना बढ़ जाता है। लोग इसे अपनी आदतें सुधारने, मन को शांत करने और आध्यात्मिक तौर पर मजबूत होने का उपयुक्त अवसर समझते हैं।इस साल पौष कब से कब तक? इस बार पौष महीने की शुरुआत 5 दिसंबर 2025 से हो रही है और यह 3 जनवर...