दरभंगा, मई 12 -- राजीव रंजन झा, दरभंगा। छोटे-छोटे अणुओं के जुड़कर बड़े अणु के निर्माण से पॉलीमर बनता है, जिसके बिना आधुनिक मानव जीवन असंभव है। स्मार्ट पॉलीमर से हमारा भविष्य उज्ज्वल होगा, क्योंकि इसका दोबारा प्रयोग भी होगा, प्रदूषण नहीं फैलाएगा तथा यह बायोडिग्रेडेबल भी होगा। यह भी पढ़ें- रसायन विभाग में व्याख्यान आजपॉलीमर का इतिहास और महत्व ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर रसायन शास्त्र विभाग में मंगलवार को पॉलीमर : कल, आज और कल विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में मुख्य वक्ता एमआर महिला कॉलेज के पूर्व रसायनशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. विवेकानन्द झा ने उक्त बातें कही। डॉ. झा ने पॉलीमर का इतिहास, प्रकार, महत्त्व, सदुपयोग एवं दुरुपयोग पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि कहा कि यदि हम पॉलीमर का विवेकपूर्ण उपयोग करें तो यह हानिकारक...