नई दिल्ली, अगस्त 19 -- नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। हाईकोर्ट ने कहा है कि पॉक्सो मामलों में बाल गवाह से जिरह करने से बचाव पक्ष को रोका नहीं जा सकता। साथ ही यह भी साफ किया कि बच्चे को आक्रामक सवालों और चरित्र हनन से सुरक्षा देना अदालत की जिम्मेदारी है। न्यायमूर्ति चंद्रशेखरन सुधा की पीठ ने स्पष्ट किया कि बच्चे की गरिमा की रक्षा का अर्थ यह नहीं कि बचाव पक्ष को जरूरी सवाल पूछने या अपने बचाव में सुझाव देने के अधिकार से पूरी तरह वंचित कर दिया जाए। पीठ ने यह टिप्पणी 11 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म और गंभीर प्रवेशनात्मक यौन हमले के मामले में दोषी की अपील खारिज करते हुए की। निचली अदालत ने आरोपी को 12 साल के कठोर कारावास और 12 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने दोषसिद्धि बरकरार रखी。 यह भी पढ़ें- पॉक्सो मामले में बच्चे से जिरह पर रोक नहीं...