रांची, जनवरी 14 -- रांची, वरीय संवाददाता। पेसा नियमावली 2025 के लागू होने से राज्य के पांचवीं अनुसूचित क्षेत्रों में नए पारंपरिक गांव के मुखिया की संख्या बढ़ जाएगी। ऐसा इसलिए कि नियमावली के नियम 2 छ, 3, 4, 5 और प्रपत्र 1 और प्रपत्र 2 के अनुसार पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र में मौजूदा राजस्व गांव का हर टोला एक नया गांव बन सकता है। उसकी एक अलग ग्रामसभा हो सकती है और अलग ग्राम प्रधान हो सकते हैं। ये बातें पूर्व मंत्री देवकुमार धान ने पेसा पर विश्लेषण के आधार पर कही। उन्होंने नई नियमावली के प्रावधानों को लेकर आठ बिंदुओं पर सवाल खड़े किए हैं। बताया कि अभी हर राजस्व गांव में कई टोले हैं और गांवों में एक मांझी, एक मुंडा, एक महतो, एक पाहन, एक देवरी आदि हैं। लेकिन नई नियमावली के अनुसार हर टोले में ये पारंपरिक अगुवा हो जाएंगे। जिले के डीसी के पास पारंपर...
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