रांची, अप्रैल 19 -- मुरहू, प्रतिनिधि। झारखंड उलगुलान संघ के संयोजक अलेस्टेयर बोदरा ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर 21 अप्रैल को जिला समाहरणालय, खूंटी के समक्ष प्रस्तावित एक दिवसीय धरना को ऐतिहासिक करार दिया है। उन्होंने कहा कि पेसा कानून आधारित पारंपरिक ग्राम सभाओं के विशेषाधिकारों की अनदेखी और ग्राम स्वशासन पर 'मुखिया राज' थोपने के खिलाफ यह आंदोलन महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगा। बोदरा ने कहा कि पेसा नियमावली को लेकर अनुसूचित क्षेत्रों के ग्रामीणों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। आदिवासी समाज ग्राम स्वशासन के नाम पर किसी भी प्रकार की केंद्रीकृत व्यवस्था को स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि पारंपरिक स्वशासी व्यवस्था आदिवासी जीवन, संस्कृति और सामाजिक संरचना का आधार है, जिसे कमजोर करने का प्रयास बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।धरना सिर्फ शुरुआत, संघर्ष रहेगा ...
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