लखनऊ, फरवरी 17 -- केजीएमयू जनरल सर्जरी विभाग में विशेषज्ञों ने साझा की जानकारी लखनऊ, वरिष्ठ संवाददाता। पेट की टीबी के मामले भी तेजी से सामने आ रहे हैं। यह आंतों, पेट की परत या लसीका ग्रंथियों को प्रभावित करती है। पेट की टीबी का समय पर इलाज जरूरी है। यह जानकारी कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में सर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. जीडी यादव ने दी। वह मंगलवार को केजीएमयू जनरल सर्जरी विभाग के स्थापना दिवस समारोह से पूर्व सर्जिकल एजुकेशन प्रोग्राम को संबोधित कर रहे थे। डॉ. जीडी यादव ने कहा कि पेट की टीबी में मरीज का वजन तेजी से घटता है। मरीज को लगातार पेट दर्द, भूख न लगना, हल्का बुखार, उल्टी-दस्त, पेट में सूजन और कमजोरी जैसी शिकायत होती है। कई बार मरीज इन लक्षणों को सामान्य गैस या अपच समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। टीबी कमजोर प्रतिरोधक क्षमता, कुपोषण औ...
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