सहरसा, जनवरी 30 -- ट्रेन कोचों की तय समयावधि पर ओवरहॉलिंग या कहें कि पीरियॉडिक ओवरहॉलिंग (पीओएच) के मामले में पूर्व-मध्य रेलवे अब तक आत्मनिर्भर नहीं हो सका है। अधिकांश कोचों को इसके लिए दूसरे जोन की वर्कशॉप में भेजना पड़ता है। बिहार के नालंदा स्थित हरनौत सवारी गाड़ी मरम्मत कारखाने में प्रतिमाह मात्र 75 कोचों की ही पीरियॉडिक ओवरहॉलिंग हो पाती है। बाकी बचे कोचों को इसके लिए उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और प. बंगाल के लिलुआ कारखाना भेजना पड़ता है। हरनौत से कोच ओवरहॉलिंग के एक माह के अंदर वापस कोचिंग डिपो लौट जाता है। वहीं गोरखपुर और लिलुआ से कोचों के वापस आने में डेढ़ से दो माह लग जाते हैं। दूरी अधिक होना और अपने जोन की ट्रेन कोचों की ओवरहॉलिंग का लोड रहना इसका कारण है। ऐसे में पूर्व मध्य रेल के सहरसा, समस्तीपुर, दानापुर, पटना सहित अन्य जगहों से कम ...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.