नई दिल्ली, अप्रैल 1 -- नई दिल्ली। पूर्वांचल भारत की उस गहरी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है, जिसने सदियों से पूरे विश्व को दिशा दी है। यहां की धरती केवल भौगोलिक सीमा नहीं है, बल्कि विचार, साधना और सृजन की भूमि रही है। उक्त बातें लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने गांधी दर्शन प्रांगण, राजघाट में पूर्वांचल महोत्सव-9 के सम्मान सत्र को संबोधित करते हुए बतौर मुख्य अतिथि कहीं। बिरला ने कहा कि जब हम पूर्वांचल की बात करते हैं, तो हमें एक ऐसी ऊर्जा का अनुभव होता है, जो समाज के हर क्षेत्र चाहे वह सार्वजनिक जीवन हो, कला हो या सामाजिक सरोकार में दिखाई देती है। यह क्षेत्र अपने भीतर अनगिनत सांस्कृतिक रंगों को समेटे हुए है, जो निरंतर हमारे राष्ट्रीय जीवन को समृद्ध करते हैं। बिरला ने पूर्वांचल की 6 हस्तियों को माटी सम्मान-9 से सम्मानित भी...