लखनऊ, जनवरी 19 -- लखनऊ, विशेष संवाददाता। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने पूर्वांचल व दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों का निजीकरण प्रस्ताव तत्काल निरस्त किए जाने की मांग की है। संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने कहा कि हाल के वर्षों में सरकारी वितरण कंपनियों ने केवल अपनी वित्तीय स्थिति को मजबूत किया है। राजस्व वसूली और लाइन हानियों में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया जा रहा है। केंद्र सरकार के विद्युत मंत्रालय ने स्वीकार किया है कि देश की सरकारी विद्युत वितरण कंपनियों ने व्यापक सुधार करते हुए एक नया अध्याय लिखा है। वर्ष 2013-14 में जहां डिस्कॉम Rs.67,952 करोड़ के घाटे में थे, वहीं वर्ष 2024-25 में उनकी स्थिति सुधरकर Rs.2,701 करोड़ के मुनाफे में आ गई है।
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