पूर्णिया, अप्रैल 16 -- पूर्णिया, हिन्दुस्तान संवाददाता।पूर्णिया जिले में तेलहन की खेती अब सिर्फ वैकल्पिक फसल नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से लाभकारी खेती के रूप में उभर रही है। करीब 2 हजार हेक्टेयर में यह खेती हो रही है। हालांकि, पहले यह इससे अधिक रकबे में होती थी। इसे बावजूद यदि किसानों को उचित बाजार और तकनीकी सहयोग मिले, तो यह क्षेत्र तेलहन उत्पादन में नई पहचान बना सकता है। तेलहन उत्पादन बढ़ने से न सिर्फ किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि खाद्य तेल के आयात पर निर्भरता भी कम होगी। यही कारण है कि सरकार तेलहन मिशन के तहत इस क्षेत्र को प्राथमिकता दे रही है। यह भी पढ़ें- टेढ़ागाछ में तेलहन की खेती ना के बराबर कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक पूर्णिया की मिट्टी, पर्याप्त नमी और ठंडा मौसम तिलहन फसलों के लिए अनुकूल है। खासकर सरसों की खेती से किसानों को कम लागत में...
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