नई दिल्ली, मार्च 20 -- उत्तराखंड के चंपावत जिले में टनकपुर के निकट अन्नपूर्णा शिखर पर स्थित मां पूर्णागिरी मंदिर भारत के सबसे प्रसिद्ध शक्तिपीठों में से एक है। लगभग 3000 मीटर की ऊंचाई पर शारदा नदी (काली नदी) के तट पर विराजमान यह मंदिर आस्था, तपस्या और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत केंद्र है। इसे 51 शक्तिपीठों और 108 सिद्धपीठों में गिना जाता है। मंदिर तक पहुंचने की खड़ी चढ़ाई भक्तों के लिए शारीरिक और मानसिक तपस्या का प्रतीक है, जो उन्हें देवी की कृपा प्राप्त करने के लिए तैयार करती है। आइए जानते हैं इस पवित्र धाम की कथा, महत्व, परंपराएं और विशेष बातें।मां पूर्णागिरी मंदिर का धार्मिक महत्व पूर्णागिरी मंदिर देवी शक्ति का एक प्रमुख केंद्र है, जहां मां सती की नाभि गिरी थी। यह स्थान सिद्धपीठ होने के साथ-साथ शक्तिपीठ भी है। मंदिर की ऊंचाई और प्राकृत...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.