नई दिल्ली, सितम्बर 19 -- पूजा-पाठ, हवन या किसी शुभ काम की शुरुआत में आपने 'स्वस्ति वाचन' जरूर सुना होगा। धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत इसी वैदिक मंत्र से होती है। लेकिन आखिर स्वस्ति वाचन क्या है और पूजा के आरंभ में इसे पढ़ने की परंपरा क्यों बनी? 'स्वस्ति' शब्द का अर्थ ही कल्याण, मंगल और भलाई से जुड़ा है। यानी इस मंत्र के जरिए अपने साथ-साथ सभी के सुख और कल्याण की कामना की जाती है। वैदिक परंपरा में इसे शुभ कार्य की शुरुआत से पहले मंगल प्रार्थना के रूप में देखा जाता है।स्वस्ति वाचन मंत्र में क्या कहा गया है? स्वस्ति वाचन का उल्लेख ऋग्वेद के प्रथम मंडल के 89वें सूक्त में मिलता है। इसमें देव शक्तियों से कल्याण और सुरक्षा की प्रार्थना की गई है। मंत्र में कहा जाता है,स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः।स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः।स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अ...