धनबाद, जनवरी 1 -- झरिया, वरीय संवाददाता नया साल 2026 की शुरुआत करने के लिए लोग अपना-अपना सुगम तरीका अपनाएंगे। झरिया में पहले जंगल और झाड़ियां अधिक थी। लोग पिकनिक मनाते थे। मजदूर वर्ग की संख्या अधिक थी। ओपन कास्ट परियोजनाओं के आने के बाद से तथा आग और भूं-धसान के कारण स्थितियां बदली है। ना जंगल बचे हैं, ना ही पिकनिक मनाने का स्थल। अधिकतर लोग मंदिरों में पूजा अर्चना करते हैं। उसके बाद ही कहीं जाते हैं। झरिया के श्याम प्रभु मंदिर, राधा कृष्ण मंदिर, बूढ़ा शिव मंदिर, अलकडीहा धाम, भगतडीह स्थित मां दुखहरिणी धाम, चासनाल स्थित मां कल्याणेश्वरी मंदिर, जोड़ापोखर स्थित शिव मंदिर, सिन्दरी का साई मंदिर, सहित सभी देवी देवताओं के मंदिरों में व्यापक व्यवस्था की गई है। मंदिरों को सजाया गया है। श्याम मंदिर से निसान शोभा यात्रा भी भक्त निकालेंगे। मंदिर के पुज...
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