हजारीबाग, जून 9 -- हजारीबाग हमारे प्रतिनिधि जिला प्रशासन का पुस्तक दान करो अभियान शहर के रसूखदार कोचिंग संचालकों और पुस्तक विक्रेताओं की बेरुखी की भेंट चढ़ गया है। शहर में शिक्षा का व्यापार करने वाले 200 से अधिक कोचिंग संस्थानों और पुरानी किताबों का जखीरा रखने वाले विक्रेताओं के पास प्रशासन की अपील का कोई असर नहीं दिख रहा है। नतीजा यह है कि ज्ञान की ज्योति जलाने के लिए शुरू की गई यह मुहिम अब महज कागजों और सोशल मीडिया तक सिमट कर रह गई है। हजारीबाग के पुस्तकालय को समृद्ध करने के लिए प्रशासन ने जो उम्मीद संजोई थी, वह धराशायी होती दिख रही है। यह भी पढ़ें- 1500 सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदली शहर के नामी कोचिंग संस्थानों में हर साल हजारों छात्र पढ़ाई पूरी कर पुरानी किताबें छोड़ जाते हैं। ये किताबें या तो रद्दी में बिक जाती हैं या कबाड़ में फेंक ...