नई दिल्ली, मार्च 11 -- सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को पटना के एक ऐतिहासिक पुस्तकालय के अधिग्रहण की अनुमति देने वाला कानून रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि इस तरह के अधिग्रहण के लिए एक रुपये के सांकेतिक मुआवजे का प्रावधान 'भ्रामक' था और इसमें निष्पक्षता के बुनियादी गुण मौजूद नहीं थे। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने पटना हाईकोर्ट के 2024 का आदेश रद्द करते हुए कहा कि श्रीमती राधिका सिन्हा संस्थान और सच्चिदानंद सिन्हा पुस्तकालय (अधिग्रहण एवं प्रबंधन) अधिनियम, 2015 को असंवैधानिक घोषित किया जाता है और तदनुसार इसे निरस्त किया जाता है। हाईकोर्ट ने पहले पुस्तकालय के अधिग्रहण को बरकरार रखा था। पीठ ने निर्देश दिया कि पुस्तकालय का प्रबंधन और प्रशासन मूल न्यास को वापस सौंप दिया जाए। बिहार की राजधानी के मध्य में स्थित दो मंजिला इमारत को आ...