नई दिल्ली, अक्टूबर 16 -- यशोवर्द्धन झा आजाद, पूर्व आईपीएस अधिकारी किसी भी सफल लोकतंत्र में पुलिस की सबसे कठिन परीक्षा नाराज नागरिकों के सामने संयम बनाए रखने की होती है। प्रदर्शनकारियों के मामले में कानून का पालन करते हुए उनके अधिकारों को भी सुरक्षित बनाए रखना आवश्यक होता है। हालिया विरोध-प्रदर्शनों ने इसी कसौटी पर पुलिस के रवैये और राजनीतिक नेतृत्व की समझ, दोनों को कठघरे में खड़ा किया है। अभी पुलिस से कोई संतुष्ट नहीं दिखता। सरकार को लगता है कि वह पर्याप्त कार्रवाई नहीं करती, विपक्ष को उसकी लगभग हर कार्रवाई अनुचित लगती है, लेकिन पुलिस को अधिक पेशेवर, सक्षम और जवाबदेह बनाने वाले सुधारों पर सबकी चुप्पी बनी रहती है। हर टकराव के बाद बहस लाठीचार्ज पर शुरू होकर वहीं समाप्त हो जाती है। उस राजनीतिक विफलता पर कम चर्चा होती है, जो समस्या को समय रहत...