वाराणसी, अप्रैल 26 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। पुरुष सूर्य के समान है तो स्त्री उसकी प्रभा है। दोनों का अस्तित्व एक-दूसरे के बिना अधूरा है। ये बातें आयोध्या के सिद्धपीठ हनुमत निवास के पीठाधीश्वर आचार्य मिथिलेशनंदिनी शरण ने कहीं। वह शनिवार को आर्य महिला पीजी कॉलेज के तेजस्विनी प्रकोष्ठ एवं सेवाज्ञ संस्थानम के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित संवाद सत्र को संबोधित कर रहे थे। 'नारी : प्रभा और प्रतिछाया' विषयक सत्र में उन्होंने कहा कि नारी को अपनी पारंपरिक गरिमा बनाए रखते हुए समय के साथ आने वाले नए परिवर्तनों और विकास के नए आयामों को भी स्वीकार करना चाहिए। वर्तमान परिवेश में नारी के समक्ष पहले की अपेक्षा अधिक चुनौतियां हैं। यह भी पढ़ें- मां जानकी का जन्म मिथिला के लिए सौभाग्य इन चुनौतियों से पार पाने के लिए सनातनी संस्कारों की आवश्यकता सबसे अधिक...