सीवान, नवम्बर 27 -- सीवान । एक समय था जब सीवान की फिज़ाओं में गन्ने की खुशबू घुली रहती थी। खेतों में खड़े ऊंचे-ऊंचे गन्ने और मिलों की आवाजें इस जिले की पहचान थीं। गन्ना केवल फसल नहीं था, बल्कि हजारों परिवारों की जीविका, रोज़गार और भरोसे का आधार था। लेकिन वक्त बदला, मिलें बंद हुईं और धीरे-धीरे किसानों की ज़िंदगी से गन्ने की मिठास गायब हो गई। अब एक बार फिर उम्मीदों के तिनके हिलने लगे हैं। राज्य में 35 बंद पड़ी चीनी मिलों को पुनः चालू करने की घोषणा ने सीवान के किसानों के भीतर नई उम्मीद जगा दी है। जिले में कभी तीन चीनी मिलें संचालित होती थीं, जिनके दम पर यहां की अर्थव्यवस्था चमकती थी। यही कारण है कि घोषणा के बाद किसान पूछ रहे हैं क्या वह पुराना दौर वास्तव में वापस आएगा? गौर करने वाली बात है कि 1939 में जिले में तीन चीनी मिलों की शुरुआत की गई ...
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