देहरादून, अक्टूबर 2 -- देहरादून। नयांगाव रतनपुर में श्रीमद्भागवत कथा में शुक्रवार को भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए कथावाचक आचार्य शिवप्रसाद ममगाईं ने पुतना प्रसंग के माध्यम से नारी के स्वरूप और उसके सामाजिक महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय सनातन परंपरा में नारी को केवल परिवार का हिस्सा नहीं, बल्कि परिवार की आधारशिला और समाज की संस्कार-शक्ति माना गया है। पुतना भगवान श्रीकृष्ण को विषपान के उद्देश्य से आई थी, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण ने उसके भीतर छिपे मातृत्व के भाव को स्वीकार करते हुए उसे भी माता के समान गति प्रदान की। यह प्रसंग बताता है कि सनातन दर्शन में मातृत्व का स्थान कितना महान और करुणामय है। इस अवसर पर आचार्य रमेश उनियाल, विधायक सहदेव पुण्डीर, आचार्य सुरेश उनियाल, आचार्य विनोद उनियाल, सरोजनी उनियाल, रूपे...