नई दिल्ली, अक्टूबर 30 -- मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के खिलाफ दिल्ली की सड़कों पर जारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच 'पीस बॉन्ड' को लेकर नया संवैधानिक और राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। आल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा की तरफ से पुलिस के सामने पीस बॉन्ड भरने से इनकार करने और 'सड़क संघर्ष' जारी रखने के फैसले ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के शीर्ष नेतृत्व- अभिजीत दिपके, आशुतोष रंका और सौरव दास के रुख से एक बड़ा विरोधाभास खड़ा कर दिया है।पीस बॉन्ड पर दस्तखत यानी विरोध का हक बेचना: नेहा बोरा का रुख 16 अक्टूबर को मंडी हाउस में प्रदर्शन के दौरान हिरासत में ली गईं नेहा बोरा ने विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने बॉन्ड भरने से साफ मना कर दिया। उन्होंने आरोप लगा...