नई दिल्ली, जून 11 -- संतान के रूप में लड़के की चाहत करने संबंधी पितृसत्तात्मक सोच और बच्चे के जन्म से पहले 'चोरी छिपे' लिंग की जांच कराने के चलन की निंदा करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि जब तक मानसिकता में बदलाव नहीं आता, तब तक गर्भधारण पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक (पीसीपीएनडीटी) अधिनियम का सख्ती से पालन करना जरूरी है। न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने कहा कि बालिकाओं के लिए बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, जननी सुरक्षा योजना, लाडली लक्ष्मी योजना जैसी कई योजनाएं इस बात का संकेत हैं कि पितृसत्तात्मक व्यवस्था में लड़कियों के साथ होने वाले प्रणालीगत भेदभाव को समाप्त करने के लिए लगातार प्रयास किये जा रहे हैं।

लिंगानुपात की स्थिति पीठ ने कहा कि काफी प्रगति हुई है, लेकिन अभी भी बहुत कुछ बेहतर करने की जरू...