गिरडीह, मई 11 -- पीरटांड़। कभी नक्सल प्रभाव के कारण सुर्खियों में रहनेवाले गिरिडीह जिले के पीरटांड़ प्रखंड में अब नक्सल गतिविधियां ढ़लान पर हैं। पुलिस और सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई के बाद क्षेत्र में शांति लौटी है। पारसनाथ पहाड़ और यहां के घने जंगल कभी नक्सलियों का सुरक्षित ठिकाना व संगठन का गढ़ माना जाता था। पहले की तुलना में अब सब शांत है। शांति लौटी, पर रोजगार नहीं है। सुरक्षा के मोर्चे पर सुधार के बावजूद क्षेत्र के मजदूरों की जिंदगी में बदलाव नहीं आया है। रोजगार सृजन की दिशा में अपेक्षित पहल नहीं हुई। स्थायी रोजगार के साधन न मिलने से युवाओं में निराशा बढ़ रही है। रोजगार के अभाव में मजदूर पलायन को मजबूर हैं। खेती ही एकमात्र आसरा

रोजगार का सहारा पीरटांड़ में खेती-बारी ही रोजगार का एकमात्र सहारा है। किसान मुख्यतः धान की फसल पर निर्भर ...