अलीगढ़, जून 19 -- अलीगढ़, वरिष्ठ संवाददाता। ताले, तहजीब और तालीम के लिए पहचाना जाने वाला अलीगढ़ अब एक ऐसी बीमारी को लेकर भी स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता का केंद्र बनता जा रहा है, जिसके बारे में अधिकांश लोग अभी तक अनजान हैं। यह कोई संक्रामक बीमारी नहीं, बल्कि खून में छिपी ऐसी आनुवंशिक विरासत है जो पीढ़ी दर पीढ़ी अपना सफर तय करती है। सिकल सेल एनीमिया, जिसे विशेषज्ञ 'खून का हंसिया' भी कहते हैं, अब उन परिवारों तक भी पहुंच रहा है जो खुद को इससे अछूता मानते रहे हैं। हर वर्ष नए मरीज और वाहक सामने आ रहे हैं, लेकिन जागरूकता अब भी पीछे है। ऐसे में विश्व सिकल सेल दिवस इस खामोश खतरे को पहचानने और रोकथाम की जरूरत का संदेश दे रहा है। यह भी पढ़ें- सिर्फ रांची जिले में 1706 से अधिक सिकल सेल एनीमिया के मरीजचिकित्सा संस्थानों के आंकड़े चिकित्सा संस्थानों ...