नई दिल्ली, मार्च 15 -- नई दिल्ली, कार्यालय संवाददाता। दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि पॉक्सो से जुड़े मामलों में सुनवाई के दौरान पीड़ित बच्चों को बार-बार अदालत में बुलाना उनके लिए गंभीर मानसिक तनाव और आघात का कारण बन सकता है, इसलिए ट्रायल कोर्ट को इससे बचना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि आपराधिक न्याय प्रक्रिया स्वयं बच्चों के लिए पीड़ा का कारण नहीं बननी चाहिए। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने कहा कि ट्रायल कोर्ट को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पीड़ित बच्चे का बयान जल्दी और बिना अनावश्यक स्थगन के दर्ज किया जाए, ताकि उसे बार-बार अदालत में पेश होने के लिए मजबूर न होना पड़े। अदालत ने कहा कि पॉक्सो कानून का उद्देश्य बच्चों के लिए न्यायिक प्रक्रिया को अधिक संवेदनशील और सुरक्षित बनाना है, ताकि मुकदमे के दौरान उनका दोबारा उत्पीड़न न हो। क...
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