नई दिल्ली, जून 22 -- सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को तीन माह से अधिक समय तक गैर कानूनी तरीके से हिरासत में रखे गए व्यक्ति को 10 लाख रुपये मुआजवा देने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी। शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ यूपी सरकार की अपील पर विचार करते हुए यह अंतरिम आदेश दिया। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और संजीव सचदेवा की पीठ ने यूपी सरकार की अपील पर संबंधित पक्ष को नोटिस जारी किया। पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट द्वारा पीड़ित व्यक्ति को 10 लाख रुपये मुआवजा दिए जाने के आदेश पर अगली सुनवाई तक रोक रहेगी। हाईकोर्ट ने 29 अप्रैल, 2026 के अपने फैसले में माना था कि मनोज कुमार की गिरफ्तारी गैर-कानूनी थी क्योंकि पुलिस गिरफ्तारी के लिखित आधार बताने में नाकाम रही, जैसा कि सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसलों में अनिवार्य किया गया है。

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