नई दिल्ली, अगस्त 22 -- नई दिल्ली, कार्यालय संवाददाता। हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी व्यक्ति को मूल या मुख्य अपराध की प्राथमिकी में गिरफ्तारी से मिली सुरक्षा का मतलब यह नहीं है कि उसे धनशोधन के अलग मामले में भी वही संरक्षण मिल जाएगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत दर्ज मामला अलग और स्वतंत्र कार्यवाही है। इस आधार पर हाईकोर्ट ने बाबाजी फाइनेंस ग्रुप से जुड़े कारोबारी राम सिंह की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।न्यायमूर्ति मधु जैन की पीठ ने कहा कि मुख्य अपराध की प्राथमिकी में मिली सुरक्षा उसी मुकदमे के संदर्भ में है। इसे अपने आप पीएमएलए के तहत चल रही अलग कार्यवाही तक बढ़ाया नहीं जा सकता। अदालत ने कहा कि आर्थिक अपराध एक अलग श्रेणी के अपराध हैं और जमानत की मांग पर विचार करते समय इनके मामले में अलग दृष्टिकोण अपनाने क...