बलिया, अक्टूबर 1 -- बलिया। पितृ पक्ष पूर्वजों को प्रसन्न करने का विशेष समय होता है। इस दौरान पूर्वजों के देहावसान की तिथि के अनुसार सनातन धर्मावलम्बी श्रद्धालु पवित्र जलाशयों व नदियों के तट पर तर्पण श्राद्ध करते हैं। जिससे पितृदेव अपने परिवार जनों को सन्तान वृद्धि, निरोगता के साथ-साथ सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। पं. अभिषेक शास्त्री का कहना है कि पितरों के लिए प्रतिवर्ष पितृपक्ष में श्राद्ध नैमित्तिक कार्य है जिस किया जाना चाहिए। सनातन धर्म में देव कर्म, पितृ कर्म, यह दो कर्म प्रत्येक सनातनियों को करना होता है। उनका कहना है कि पितृपक्ष में पितरों के तर्पण और पिंडदान का विशेष महत्व है। एक पखवारे तक चलने वाले पितृ पक्ष अमावस्या तिथि पर सर्व पितृ विसर्जन के साथ सम्पन्न होगा। सनातन धर्म के अनुसार बिना पितृकर्म किए देवकर्म का अधिकार नहीं ह...