नई दिल्ली, सितम्बर 29 -- घर में बिजली नहीं थी। लालटेन में पढ़ाई करनी पड़ती थी। पिता परिवार का पेट पालने के लिए मेहनत मजदूरी करते थे। घर की गुजर बसर के लिए वह गटर खोदने तक का काम करते थे। मां खेतों से सर पर सब्जियां ढोकर लाती थी और बेचती थीं। जब भी जरूरत होती, तब तब बेटा शरण पढ़ाई के साथ-साथ घर का गुजारा चलाने में मां का हाथ भी बंटाता था। वह अकसर सब्जियां बेचने में मदद कर दिया करता था। एक ऐसा परिवार जहां सारा ध्यान दो वक्त की रोटी कमाने पर ही दिया जा रहा हो, वहां शरण के दिल में पढ़ाई कर कुछ कर गुजरने का सपना भी पल रहा था। सपने में जान थी और तमाम मुश्किलों के बीच भी उसे जिंदा रखा गया। यह जुनून आगे चलकर महाराष्ट्र के सोलापुर के शरण कांबले को भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के पद तक ले गया। आज राजस्थान कैडर के IPS अधिकारी शरण कांबले डीग जिले के पु...