निखिल पाठक, मई 27 -- पति-पत्नी के बीच होने वाले वैवाहिक विवादों में बच्चों के भरण-पोषण से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली के तीस हजारी स्थित सेशंस कोर्ट ने एक बेहद अहम और दूरगामी टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि संतान की परवरिश केवल किसी एक अभिभावक की नहीं, बल्कि माता-पिता दोनों की संयुक्त जिम्मेदारी होती है। इस दौरान अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश निपुण अवस्थी की अदालत ने कहा कि यदि पति और पत्नी दोनों ही धन अर्जन करते (पैसा कमाते) हैं, तो उन्हें अपनी-अपनी आय और परिस्थितियों के अनुसार बच्चे के भरण-पोषण के लिए योगदान देना होगा। इसके साथ ही अदालत ने ट्रायल कोर्ट का फैसला रद्द करते हुए उसे दोबारा नई राशि का निर्धारण करने को कहा। यह मामला एक वैवाहिक विवाद से जुड़ा है, जिसमें पत्नी ने घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 12 के तहत राहत मांगी...