संभल, फरवरी 21 -- सड़क हादसे में जान गंवाने वाला 17 वर्षीय दीपक पाल सिर्फ एक छात्र नहीं था, बल्कि अपने परिवार की उम्मीदों का आखिरी सहारा था। पांच वर्ष पहले पिता कमल सिंह की पीलिया से मौत के बाद घर की जिम्मेदारियां बिखर गई थीं। उस दिन के बाद से मां उर्मिला और तीनों बहनों ने मिलकर दीपक को संभाला, पढ़ाया और एक जिम्मेदार इंसान बनाने का सपना देखा। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी। घर में नाममात्र की खेती है, जिससे दो वक्त की रोटी भी मुश्किल से जुटती थी। मां और बहनें मेहनत-मजदूरी कर घर चलाती थीं। तीनों बहनों की अभी शादी भी नहीं हुई है। वे अक्सर कहती थीं कि "पहले दीपक पढ़-लिखकर खड़ा हो जाए, फिर हमारी शादी की चिंता होगी।" दीपक भी अपनी जिम्मेदारी समझता था। गांव के लोग बताते हैं कि वह पढ़ाई में मेहनती था और घर के हालात से वाकिफ था। वह अक्सर मा...
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